Monday, 21 December 2015

इक सवाल खुद से


हूँ क्या आखिर मैं 
इक कल्पना  या ख्वाब सुनहरा ?
समझ खुद भी नहीं पाई मैं 
आखिर क्या वजूद है मेरा ?
कोई बता सके तो बता देना 
अस्तित्व क्या है मेरा ?
मुझे भी तो पता लगे 
आखिर क्या नाम है मेरा ?





Sunday, 13 December 2015

प्रिय मित्रों, पाठकों
मेरे काव्य संग्रह "उम्मीद का दीया " की एक और समीक्षा
आदरणीय श्री राजेश कुमारसिन्हा जी की कलम से ; जो कि स्वयम एक लेखक और कवि हैं!
धन्यवाद सर अपना कीमती समय देने हेतु!
और आशा करती हूँ आपके द्वारा बताई कमियों को भविष्य में अवश्य सुधारेगी मेरी कलम!
यह पहला प्रयास था मेरा काव्य कला के क्षेत्र में, पर गलतियाँ करके ही हम आगे की ओर बढ़ते हैं! यह मेरी सोच है और ईश्वर की कृपा और आप सभी के आशीर्वाद से यह मंजिल भी अवश्य कामयाबी के शिखर को छुएगी !
आभार
डॉसोनिया!!!
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युवा कवयित्री डॉ सोनिया गुप्ता का नवीनतम काव्य संग्रह “उम्मीद का दीया” मेरे सामने है,और कुछ ही देर पहले मैंने इस संग्रह को पढना खत्म किया है.सबसे पहले तो बड़ी ही इमानदारी से यह स्वीकार करता हूँ की उनकी कविताओं ने वाकई मुझे प्रभावित किया है और शायद यही वज़ह भी रही है एक ही बैठक में संग्रह को पूरा कर पाया हूँ. डॉ सोनिया की कविताएँ समय की आहट को भांपती हुई लगीं साथ ही सहज भी जो शायद पठनीयता का पहला मापदंड होती है.बेशक एक उभरते हुए हस्ताक्षर से काव्य कला की तकनीक पर पूरी तरह खरा उतरने की अपेक्षा की भी नहीं जानी चाहिए(यह मेरी सोच है) और मैंने उस पर उतना तवक्को भी नहीं दिया है. हाँ पर इसमें कोई दो राय नहीं की विषयों के चयन और उनकी प्रस्तुति में जितनी संजीदगी नज़र आती है उसे बिलकुल एक शुभ संकेत माना जाना चाहिए.
समसामयिक स्थितियों और मुद्दों को देखने का उनका अपना नजरिया है और उन स्थितियों की उन्हें बखूबी समझ भी है. यह कहने में कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी की कई रचनाओं में विषयों की विविधता है. कहीं वो दार्शनिक की तरह नज़र आती हैं तो कहीं उनकी चिंता को देखा और समझा जा सकता है साथ ही उनके अंतस की वेदना को महसूस भी किया जा सकता है.
कुछ पंक्तियाँ ,,,,इसका प्रमाण देती हैं ,,,,,,,,,,,,
बुझ कर भी जलते रहें जो दीप, रौशनी उनका अभिनन्दन करती है
बिन गरजे भी बरसें जो मेघ, वर्षा उनका अभिनन्दन करती है !!!
क्या है आखिर ये डर,
किस बात का डर,
किससे डरता है इंसान,
मुश्किलों से या खुद से ? "
कारण बन जाऊँ
किसी की मुस्कराहट का,
चाहे दो पल की ही
दे पाऊँ उसको खुशी | "
जब सुख का सागर छलकेगा,
और गम का बादल सरकेगा,
हर महफिल भी सज जायेगी,
वह सुबह कभी तो आयेगी !
हारने से क्यों डरते हो तुम ,
हार से हार मत मानो तुम
यदि जीवन में कुछ करना है हासिल ,
तो हार को गले लगाओ तुम !
असफलता , सफलता की सीढ़ी है
गिरकर संभलना ही तो जिंदगी है ,
आंसू तो केवल मज़बूरी हैं
आंसू कभी न बहाओ तुम !
इसके अलावा “भूर्ण पुकार,परिवर्तन,भ्रष्टाचार ,शिक्षक ,सोच,सुकों के पल ,ख्वाब और अभिमान जैसी कविताएँ भी हैं जो पाठकों का ध्यान खींचती हैं,,,,,,,,,,,
कुल मिला कर कहा जा सकता की डॉ सोनिया गुप्ता का यह संग्रह पठनीय है और उनके इस प्रयास की सराहना की जानी चाहिए. पर डॉ सोनिया गुप्ता जी को यह भी स्वीकार करना होगा की अभी काव्य कला की दृष्टि से उनकी रचनाओं में और परिपक्वता की ज़रूरत है!
शुभकामना के साथ
राजेश कुमार सिन्हा

Monday, 31 August 2015

Hello dear friends, readers and fellow poets
Sharing with you coverpage of my second forecoming Hindi poetry book “उम्मीद का दीया” published by THE POETRY SOCIETY OF INDIA
I feel very proud to announce the release of my new book on the auspicious 75th birthday of poet laureate sir “YAYATI MADAN G Madan Gandhi
First of all I Thank to that almighty who gave me strength to complete this work of mine.
Heartfelt thanks to my parents for their faith and showering their infinite blessings on me.
A Token of thanks to mam, “Dr. SUSHMA GANDHI DEVYANI G” for a wonderful written foreward for my book.
Thank you “MADAN GANDHI G” sir for all your blessings during my work.
My this poetry book is dedicated to GOD, my parents, brothers and sisters, teachers, friends and last but not least my students, who all have always motivated me on every step of my life.
My special thanks goes to my inspiration in the journey of my poetry; Author and poet , sir “PREETH NAMBIAR”, without whose guidance and cooperation I might not have realized my true potential.
I wouldn't be doing a justice if I do not thank Graphic designer of THE POETRY SOCIETY OF INDIA, Mr. “SHASHIKANT SHARMA” who has designed such a wonderful coverpage and helped in the timely publishing of my book.
I am glad to get my work published by “THE POETRY SOCIETY OF INDIA”, a prestigious organisation in the world.
Thank you readers, fellow poets and friends for all your love and appreciation.
उम्मीद का दीया क्यों बुझाते हो
तुम जीने से क्यों घबराते हो
मुश्किलें हैं राह में तो क्या गम है
!!तुम बेकार में शोक क्यों मनाते हो!!
I hope all of you will enjoy this collection of poetry.
With lots of love and regards
DR SONIA

Hello dear friends, readers and fellow poets
Sharing with you coverpage of my First forecoming Hindi poetry book “जिन्दगी गुलज़ार है” published by THE POETRY SOCIETY OF INDIA
I feel very proud to announce the release of my first poetry book on the auspicious 75th birthday of poet laureate sir “YAYATI MADAN G Madan Gandhi
First of all I Thank to that almighty who gave me strength to complete this work of mine.
Heartfelt thanks to my parents for their faith and showering their infinite blessings on me.
A Token of thanks to sir, “MADAN GANDHI G”. for a wonderful written foreward for my book. Thank you sir for all your blessings.
My special thanks goes to my inspiration in the journey of my poetry; Author and poet , sir “PREETH NAMBIAR”, without whose guidance and cooperation I might not have realized my true potential.
I wouldn't be doing a justice if I do not thank Graphic designer of THE POETRY SOCIETY OF INDIA, Mr. “SHASHIKANT SHARMA” who has designed such a wonderful coverpage and helped in the timely publishing of my book.
My this poetry book is dedicated to GOD, my parents, brothers and sisters, teachers, friends and last but not least my students, who all have always motivated me on every step of my life.
I am glad to get my first work published by “THE POETRY SOCIETY OF INDIA”, a prestigious organisation in the world.
Thank you readers, fellow poets and friends for all your love and appreciation.
जिन्दगी कहीं भी ले जाये हमें, बस जीना सीख लो
हर लम्हा इस जिन्दगी का इक खास एहसास है
चाहे गम हों थोड़े , थोड़ी शिकन हो
!!जिन्दगी फिर भी बस गुलज़ार है !!
I hope all of you will enjoy this collection of poetry.
With lots of love and regards
DR SONIA

Friday, 17 July 2015

ईद का ये चाँद ऐसी चांदनी बिखेर लाये सब के लिए
कि ये ईद का पर्व खूब निखर के आये सब के लिए
जो भी थी रंजिशें, गमे दिलों में खत्म हो जाएँ आज
बस केवल इक इबादत उस खुदा की रहे यहाँ आबाद
कितने इंतज़ार के बाद ये सुंदर सा चाँद आता है नजर
तभी तो ईद कर देती है सब को खुद से ही बेखबर
न हो मजहब का सवाल न किसी उम्र का हो ख्याल
बस ईद ही ईद नाम कर दे सब के दिल को निहाल
आओ मिल जुल कर बाँट लें ये खुशियों का अवसर
फिर पता नहीं कब आएगा दुबारा ये प्यारा सा पर्व

***********ईद मुबारिक सभी को ***********

Wednesday, 15 July 2015

When I look at these birds
I thank lord
What a beautiful
Creation
He has created…
So innocent
So pleasant
So calm
Full of charm
Variety of colors
Always cheer
No limits to fly
No boundaries to raise high
Sing even without violin
Make this world a heaven…

I wish
I could 
also be a bird

Fly freely
 in this world...
क्या हुआ गर तूने साथ छोड़ भी दिया है मेरा
दूर रह कर भी तू तो खास ही रहेगा सदा मेरा
तेरी सिखाई हर सीख को याद रखेगा मन मेरा
जितना भी वक्त गुजरा संग तेरे था वो सुनहरा
तेरी यादों पर तो हो सकता है थोड़ा हक मेरा
बेशक नहीं तेरी जिन्दगी पे है अधिकार मेरा 
कभी तो तुझको भी आएगा याद चेहरा मेरा
चाहे तूने भुला दिया हो हर नामो निशां मेरा